मंगलवार, 10 नवंबर 2009

राजबब्बर ने जीती प्रतिष्ठा की लड़ाई

राजबब्बर ने जीती प्रतिष्ठा की लड़ाई
नई दिल्ली। लोकसभा की फिरोजाबाद सीट पर हुई प्रतिष्ठा की लड़ाई में कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर जीत दर्ज करने में कामयाब रहे हैं। उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी और सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की बहू डिम्पल यादव को 85000 से अधिक वोटों से हराया।
यह सीट डिंपल के पति एवं सांसद अखिलेश यादव ने पिछले आम चुनाव में जीती थी परन्तु कन्नौज सीट भी जीतने के कारण उन्होंने यह सीट छोड़ दी थी।
उधर, राज्य विधानसभा उपचुनाव में सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी बढ़त बनाए हुए है, जबकि भाजपा और सपा को करारा झटका लगा है।
ताजा जानकारी के अनुसार, हैसर बाजार [सु] सीट पर बसपा के दशरथ सिंह चौहान ने कांग्रेस के नीलमणि को आठ हजार से अधिक के अंतर से हराया। सुल्तानपुर जिले की इसौली सीट बसपा उम्मीदवार वीरभद्र सिंह उर्फ सोनू सिहं ने जीत ली है। उन्होंने कांग्रेस के जयनारायण तिवारी को 49 हजार से अधिक मतों से परास्त किया। यह सीट वीरभद्र सिंह के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी जो पिछले चुनाव में यहां से सपा के टिकट पर जीते थे और बाद मे विधानसभा से इस्तीफा देकर बसपा में शामिल हो गए थे।
बसपा उम्मीदवार महेन्द्र सिंह राजपूत ने समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव को करारा झटका देते हुए उनके गृह जनपद इटावा जिले की भरथना विधानसभा सीट पर कब्जा कर लिया है। राजपूत ने सपा उम्मीदवार विमल भदौरिया को 32000 मतों से परास्त किया है।
बसपा के उम्मीदवारों सुमन देवी कुशवाहा और राजदेव सिंह ने क्रमश: ललितपुर और रारी [जौनपुर] विधानसभा सीटें जीत ली हैं। ललितपुर सीट पर बसपा उम्मीदवार सुमन देवी कुशवाहा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के चन्द्र भूषण सिंह को 14 हजार से अधिक वोटों से हरा दिया है। यह सीट सुमन देवी के पति नाथू राम कुशवाहा के निधन से खाली हुई थी।
जौनपुर की रारी विधानसभा सीट पर बसपा के राजदेव सिंह ने सपा के ओमप्रकाश दुबे को 12586 मतो से पराजित किया। यह सीट पिछले चुनाव में जनता दल [यू] के टिकट पर जीते धनंजय सिंह के इस्तीफे से खाली हुई थी। वाराणसी की प्रतिष्ठित कोलसला सीट निर्दलीय प्रत्याशी अजय राय ने 8169 मतों से जीतकर अपना कब्जा लगातार चौथी बार बरकरार रखा है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बहुजन समाज पार्टी के जे पी मिश्रा को हराया।

गुरुवार, 5 नवंबर 2009

अपने सांसद प्रत्याशी से पूछिए

जय भारत
अपने सांसद प्रत्याशी से पूछिए
थ् शैक्षणिक योग्यता
थ् पूर्व अनुभव
थ् पारिवारिक पृष्ठभूमि
थ् वर्तमान कार्य व्यवसाय
थ् किससे प्रेरित हुए
थ् क्यों नेता बनना चाहते हैं?
थ् समाज सेवा के अन्य अवसर क्यों अच्छे नहीं लगते?
थ् अपने वेतन मानदेय का क्या करेंगे?
थ् आय, जाति, ध्र्म और राष्ट्र में किसे प्राथमिकता देते हैं?
थ् बालश्रम, महिलाओं, शोषितों, पीड़ितों के लिए आपकी कार्यसूची क्या है?
थ् आपने देश के लिए व्यत्तिफगत तौर पर पिछले 10 वर्ष में क्या किया।
थ् पूरे क्षेत्रा में व्याप्त यातायात की समस्या से निपटने के लिए क्या योजना बनाई ?
थ् विद्यालयों में हुई पफीस बढ़ोतरी से निपटने के लिए उन्होंने अपनी पार्टी/दल द्वारा सरकार पर क्या दबाव बनाया?
थ् आपकी दश्ष्टि में वर्तमान में राष्ट्रीय समस्याएं कौनतकौन सी है। उनका निवारण कैसे होगा।
थ् यदि आप पहले भी सांसद रह चुके है तो कौन त कौन सी राष्ट्रीय समस्याओं के हल के लिए कितनी बार संसद में आवाज उठाई? या दलगत राजनीति में ही उलझे रहे।
थ् पिछले दस वर्ष में किसी राष्ट्रीय मुद्दे पर उन्होंने कोई वत्तफव्य दिया हो तो बताएं।
थ् जो मुद्दे उठा रहे हैं उनसे संबंध्ति आंकड़े और सबूत उनके पास हैं? यदि हां तो जनता के सामने प्रस्तुत करें।
थ् सेवा के अन्य क्षेत्रा छोड़कर सांसद का चुनाव ही क्यों अपनाया हैं? संसद में पहुंचकर वे क्या करना चाहते हैं?
थ् सक्रिय राजनीति से बाहर रहते हुए कितनी बार क्षेत्रा की समस्याओं के लिए आवाज उठाई? इस क्षेत्रा में बहुत सी समस्याएं हैं, इनके निपटारे के लिए क्या कोई कदम उठाने की कभी कोशिश की ?
थ् पिछले 10 वर्षों में इस पूरे क्षेत्रा के विकास जैसे सड़क, सामुदायिक भवन, स्कूल आदि के लिए आपका क्या योगदान रहा?
थ् आपकी पार्टी को स्विस बैंक में जमा ध्न की याद इस लोकसभा चुनाव में ही क्यों आई, इससे पहले इस मुद्दे पर क्यों नहीं कुछ कहा गया?
थ् यदि आप भाजपा प्रतयाशी है तो जब भाजपा सत्ता में थी तो राम मंदिर बनवाने और धरा-370 को हटवाने, समान नागरिक अध्किार के लिए क्या किया?
थ् इसकी क्या निश्चितता है कि चुनाव जीतने के बाद आप पिफर से अपने वचनों से नहीं भागेंगे?
थ् राष्ट्रहित में क्या योजनाए है आपके दल की, आपकी निजी?
थ् आज से पूर्व आप द्वारा किये गये राष्ट्रहित कार्य?
थ् अंग्रेजों की पफूट डालो राज करो नीति से बचने के उपाय? या उसी की पुष्टि करेंगे बाकी स्वार्थी नेताओं की तरह।
थ् मैं आपको अपना मत क्यों दूं?
थ् क्या आप हमें अंग्रेजी राज से मुक्ति दिला पायेंगे?
थ् क्या आप हमें जाति-ध्र्म-क्षेत्रातभाषा के विवादों से मुक्ति दिलायेंगे।
क्या आप हमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को स्थापित कराएंगे। यही सच्ची स्वाध्ीनता होगी, क्योंकि अभी तक अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया है, भारत को कोई नही जानता।
थ् राष्ट्र भाषा का अपमान राष्ट्र ध्वज के समान ही होता है इसलिये भारत के सभी सरकारी कार्य, न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय, संसदीय कार्यवाही आप हिन्दी में करा पायेंगे?
थ् भाषा के बिना राष्ट्र गूंगा ही नहीं वरन् लंगड़ा, लूला व बहरा भी हो जाता है। इसलिये 125 करोड़ लोगों की भाषा वाला राष्ट्र सर्वोत्तम है और हमसे विश्व है, यही मेरा स्वाभिमान है, हम ही अंतर्राष्ट्रीय है। हम किसी से कम नहीं।
थ् भारत के स्वाभिमान को जगाने के क्या उपाय है आपके पास
थ् क्या आप सबको समान शिक्षा, अपनी राष्ट्र भाषा में उच्च शिक्षा लागू करा पायेंगे? क्योकि भारत में अभी तक उच्चशिक्षा ;अभियंता, चिकितसक, एमबीए, एमसीए, विज्ञान एवं तकनीकी, अन्तरिक्ष, समुद्र, भू विज्ञान आदिद्ध का एक भी महाविद्यालय नही है। इन विद्याओं को पढने के लिए हमें पहले अंग्रेज बनना पडता है। क्या आप मेरे देश के गौरव को बचाने में मेरी सहायता करेगे? सबको रोजगार, समान अध्किार योग्यतानुसार दिला पाएंगे।
थ् आप अपने बच्चो को मेरे गाँव के सरकारी विद्यालय में पढ़ाएंगे/ पढ़ाए है या किसी महानगर के वातानुकुलित 5 सितारा पब्लिक स्कूल में विदेशी गुलामी की भाषा में पढ़ाकर हम पर रोब जमाने के लिए तैयार किए है/करेंगे।
थ् क्या आप सभी औषध्यिों पर उनका विवरण मेरी राष्ट्रभाषा में लिखा पाएंगे।
थ् क्या आप भारत से भ्रटाचार व जातिवाद मिटा पायेंगे। सभी तरह के पफार्म प्रारूप से जाति वाला काला ध्ब्बा मिटा पायेंगे? जिसकी आज अतयन्त आवश्यकता है।
थ् इस देश में ध्र्म परिवर्तन का अध्किार सबको है, जाति परिवर्तन का क्यों नहीं? क्या आप जाति बदलने का अध्किार अर्थात जातिवाद मिटाने में महतवपूर्ण निभा पायेंगे या कर्मानुसार नई जातियों को मान्यता दिला पायेंगे? जो जन्म के नही वरन् कर्म के आध्र पर हो और व्यक्ति के बाद बच्चो को ना परोसी जाये।
थ् अगर आप पूर्व में सांसद रहे है तोतआपने सरकार को कितने सुझाव दिए या दलगत राजनीति में ही उलझे रहे, कितनों पर सुनवाई हुई, नहीं तो क्यों?
थ् आपने संसद में कितने जनहित/राष्ट्रहित के प्रश्न पूछे?
थ् अंग्रेजों ने भारत के स्वाभिमान को मिटाने के लिए भारतीय संस्कृति पर प्रहार करके अंग्रेजी भाषा और अंग्रेजी दिशाहीन, अवैज्ञानिक, अव्यवहारिक भ्रामक, चरित्राहीन, असमान, दोहरे मापदंडों वाली भ्रष्टाचारी, व्याभिचारी, मानवीय मूल्यों से दूर मौद्रिक मूल्यों पर आधरित, पूंजीवादी, सामाज्यवादी, सामन्तवादी शिक्षा व संस्कृति का प्रचार प्रसार किया और स्वतंत्राता के बाद भी वो ही सब जारी रहा। क्या आप भारत में पुनः अपनी सम्पूर्ण वैज्ञानिक संस्कारवान, सत्यनिष्ठवान, कत्र्तव्यनिष्ठ, चरित्रावान, स्पष्ट, समरस, समानता उतपन्न करने वाली शिक्षा प(ति, भारत को विश्वगुरू बनाने वाली संस्कृति स्थापित करा पायेंगे?